तुम्हे अपना बनाने को जी चाहता है,
एक बार छू जाने को जी चाहता है |

सदियों से तुमको यूं ढूँढा है मैंने
बस एक बार पाने को जी चाहता है |

निगाहें उठाने की जुर्रत भी की,
कि निगाहें मिलाने को जी चाहता है |

वीराने में फिर एक खनक सी तो हो
तुम्हे फिर हँसाने को जी चाहता है |

कई बार सोंचा कि तुमसे कहूं
तुम्हे पास लाने को जी चाहता है |

मगर इस दूरी में भी वो कसक है
फिर तरस जाने को जी चाहता है |

ये जाना कि किस्मत नहीं तुम हमारी
मगर आजमाने को जी चाहता है |

~Yours Truly